भाजपा नेता सन्नी टोप्पो ने इस मुद्दे पर राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की पर निशाना साधा है।

मांडर विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों किसान यूरिया की भारी कमी और कालाबाजारी से जूझ रहे हैं। आरोप है कि खुले बाजार में यूरिया तय कीमत से काफी अधिक दाम पर बिक रहा है, जबकि सरकारी केंद्रों पर यह उपलब्ध नहीं है। इस गंभीर समस्या को लेकर कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं।
यूरिया के नाम पर किसानों से लूट
सन्नी टोप्पो ने दावा किया है कि राज्य भर में किसानों को यूरिया की एक बोरी 550 रुपये में बेची जा रही है, जबकि इसकी सरकारी कीमत बहुत कम है। उनका कहना है कि इस तरह की लूट से भोले-भाले किसान बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन कृषि मंत्री इस पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस का “हाथ किसानों के साथ” का नारा सिर्फ चुनावी वादा बनकर रह गया है, क्योंकि मौजूदा सरकार किसानों के साथ हो रहे अन्याय पर कोई कदम नहीं उठा रही है।
यही नहीं मंत्री के तीन महीने का कार्यकाल: “शून्य”
भाजपा नेता सन्नी टोप्पो ने मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के तीन महीने के कार्यकाल पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सन्नी टोप्पो ने कहा कि मंत्री का कार्यकाल “शून्य” रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री केवल पोस्टर और बैनर लगाकर अपना चेहरा चमकाने में व्यस्त हैं, जबकि किसानों की मूल समस्याओं पर उनका ध्यान बिल्कुल नहीं है।
श्री टोप्पो ने कहा, “मंत्री सिर्फ नाम के लिए कह रही हैं कि वे किसानों के साथ हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। अगर वे सच में किसानों के साथ होतीं, तो आज यूरिया की कालाबाजारी नहीं होती और किसानों को इस तरह परेशान नहीं होना पड़ता।
ओलावृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई भी नहीं
श्री टोप्पो ने यह भी उजागर किया कि हाल ही में हुई ओलावृष्टि के कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ था, लेकिन सरकार ने अभी तक उन्हें कोई मुआवजा या क्षतिपूर्ति नहीं दी है। इस दोहरी मार से किसान परेशान हैं और उनके बीच रोष बढ़ रहा है।
साथ ही किसानों की उम्मीदें और भी कमजोर होती जा रही हैं।
किसान परेशान, सरकार निष्क्रिय
यूरिया की कमी से परेशान किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई किसानों को मजबूरी में अधिक दाम पर यूरिया खरीदना पड़ रहा है, जिससे उनकी लागत बढ़ रही है। इस स्थिति से किसानों में आक्रोश है।
साथ ही उन्होंने कहा कि अगर समय रहते सरकार ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया, तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होगा।
मांडर विधानसभा क्षेत्र में आंदोलन की चेतावनी
उन्होंने झारखण्ड सरकार से कहा है की जल्द से जल्द किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए। नहीं तो उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही किसानों की इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे मांडर विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ा और उग्र आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि वह हमेशा किसानों के साथ खड़े हैं और उनकी लड़ाई में उनका साथ देंगे।




